Saturday, March 30, 2013


साला, हरामी, कुत्ता, इडियट!
वीरेन्द्र कुमार सिंह 
बैठे बैठे देर तक सोचता रहा कि गालियों की सूचि में कितनी ऐसी गालिया हैं जिन्हें हम शुद्ध रूप से पुरुषोन्मुखी  कह सकते हैं।  किन्तु मन 'उडी जहाज को पंछी, फिर जहाज पै आवे' की तर्ज़ पर उमड़-घुमड़कर पर इन्हीं चार शब्दों केचक्कर  काटता रहा। सोचा, चलो ना से हाँ भला, कुछ तो है कहीं पुरुषों के लिए।

लेकिन यहाँ भी धोखा! इन गालियों का निमित्त भी स्त्री अस्मिता की अनदेखी नहीं करता। 'साला' यानी पत्नी का भाई। 'साला' सिर्फ दो पुरुषों के बीच के रिश्ते का नाम नहीं है, इसमें एक स्त्री की अस्मिता अदृश्य तौर पर सदैव मौजूद रहती है। भाई के सामने पति जिस उन्मादी शक्ति का अनावश्यक प्रदर्शन करता रहता है उसका असली स्रोत भी स्त्री देह है। रिश्तों में बंधकर भी स्त्री पवित्र नहीं हो पाती। एक पुरुष के लिए स्त्री यहाँ भी भोग्या ही बनी रही। जो भोगे सो सिकंदर, जो भुगते सो बंधक। सो, अब साला भी मेरी इस सूचि से गायब हो गया है।

'हरामी' की भी यही कहानी है। हरामी उस औलाद को कहते हैं जिसके बाप के बारे में किसी को कोई मुक़म्मल जानकारी नहीं होती। भारत की जाति -व्यवस्था के हिसाब से अंतरजातीय विवाह से पैदा हुए संतान भी हरामी माने जायेंगे। समझ में नहीं आता कि पुरुष  के  पहचान की अनिश्चितता आखिर स्त्री उसके बच्चे की पहचान को कैसे मटियामेट कर सकती है? नहीं, मुझे अब यह गाली भी अपनी सूचि में नहीं रखनी है क्योंकि यह गाली जातिसूचक, बाल-विरोधी  स्त्री-विरोधी है।

अलबत्ता, 'कुत्ता' नामधारी गाली में कोई ज्यादा पेंच नहीं दीखता। जातिवाचक संज्ञा के रूप में 'कुत्ता' की उपमा उन पुरुषों के लिए उचित जान पड़ता है जो यौन के प्रति OCN (OBSESSIVE COMPULSIVE NEUROSIS) के शिकार होते हैं। इसका प्रभाव क्षेत्र भी पुरुष देह है, बीच में स्त्री कहीं भी शामिल नहीं है। मैं इसे अपनी गालियों की सूचि में सुरक्षित कर रहा हूँ।

'इडियट' को लेकर मेरे मन में भी शंका है कि इसे गाली मानूं कि नहीं। खैर, एक बात तो साफ है कि 'इडियट' शब्द में वह आभा नहीं है जिसे हम अमूमन गालियों में देखते हैं। व्याकरण के हिसाब से हम इसे लिंग रहित अथवा उभयलिंगी मान सकते हैं। तुलनात्मक रूप से देखा जाये तो इस गाली में शांतिप्रियता भी अधिक है। 'इडियट' कह देने भर से कहीं खून-खराबा नहीं हो सकता, गोली नहीं चल सकती।

यानी, ‘कुत्ताऔरइडियट’ जैसी गालियाँ  गालियों के नवाचार में फिट बैठते हैं। आप भी सोचिये और सूचि को बढाईये। 

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